बाबूजी ज़रा चोद लो चूत खड़ी है यहाँ


Antarvasna, hindi sex story एक राजा था एक रानी थी दोनों में भरी हुयी जवानी थी और उसके आगे लवड़ा मेरा | देखा गाली देते ही पता तो चल गया होगा कि आपका दोस्त मुन्नू मास्टर आ गया है | हां तो दोस्तों काफी दिनों तक गायब रहने के बाद मैं आज आपके लिए एक मसाला युक्त कहानी लेकर आया हूँ जहाँ मुझे लगता है आपको अपना लंड हिलाने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी क्यूंकि मुट्ठ अपने आप गिर जाएगा | वैसे मुझे पता चला है आजकल पुराने लोगों के साथ साथ नए लोग भी कहानी पढने में दिलचस्पी लेने लगे हैं ? अगर ऐसा है तो दोस्तों जिनको नहीं पता वो मेरा असली नाम जान लीजिये जो कि बाबा उस्मानी है | मैं एक गाँव का इंसान हूँ जो धरती से जुड़ा रहता है और चुदाई के बारे में सोचता रहता है | ये चूत और चुदान जिसकी जिंदगी में ना हो तो वो जीना भी क्या जीना है मेरे दोस्त | मैं बचपन से ही कलाकार रहा हूँ और पेंटिंग करना मेरी खासियत रही है | मैंने अपनी इसी कला के दम पर न जाने कितनी लड़कियों और औरतों को चोदा और वो आज भी मेरे लंड को चूमने के लिए तरसती हैं |

तो चलिए अब किस्सा शुरू करते हैं हम अपनी चुदाई वासना का | तो दोस्तों होता ये था कि मैं जब अपनी कला का प्रदर्शन करता था तो गाँव के मुखिया मेरा सम्मान करते थे और सबको मेरे बारे में पता चलता था | इससे मेरी जीविका भी चल जाती थी और मेरे खेत का खर्चा भी निकल जाता था | मेरी जिंदगी आराम से कट रही थी पर नाजाने क्यूँ जब मैं 28 साल का हुआ तब मेरे साथ कुछ अजीब सा घटने लगा | हाँ ऐसा सच में हो रहा था मेरे साथ और जो लोग मेरी कहानी पढ़ रहे हैं या फिर आगे कभी पढेंगे वो भी इस चीज़ को अपने अन्दर महसूस करने लगेंगे | ये उम्र मेरे लिए नए रंग लेकर आई थी जैसे मुझे एक १८ साल कि लड़की पसंद आती तो साथ में मुझे उसकी माँ के साथ भी प्यार होने लगता | अब ऐसी समस्या से घिरा हुआ इंसान भला करे भी तो क्या करे कुछ समझ नहीं आता | फिर मैंने मन में विचार किया कि इसका नतीजा क्या हो सकता है | उसके बाद मुझे समझ आया कि लड़की और उसकी माँ दोनों को चोदना चाहिए जिससे मन को तसल्ली मिल जाए |

अब विचार तो कर लिया पर ऐसा हो जाए यही बड़ी बात थी | पर एक दिन ये सब सच होता नज़र आ रहा था | वो क्या है जो हमारे गाँव का मुखिया है वो साला नल्ला है और उसकी लड़की है १९ साल की जो कि मस्त माल है | उसके ऊपर से उसकी बीवी यानी लड़की की माँ उससे भी बड़ा माल है | अब ऐसे माल को कोई भला कैसे छोड़ दे | इसलिए मैंने एक कला प्रदर्शनी लगाने के बारे में सोचा जिसमे मैंने नंगी लड़कियों और औरतों का चित्रण किया और बड़े बड़े लंड भी दिखाए | सब आये और मेरी कला को देखकर हैरान हो गए पर मुखिया का परिवार इन कलाकृतियों को बड़े ध्यान से देख रहा था | उसकी बेटी अलका और बीवी वैशाली तो जैसे डूब से गए थे | वो दोनों एरे पास आये और कहा क्या गज़ब का सार पेश किया है आपने पेंटर बाबु हमे तो जैसे जन्नत सी मिल गयी | मैंने कहा भाभी जी इसमें जो बड़ा बड़ा सरिया है उसपे गौर किया आपने तो उसकी बेटी ने कहा काश ये सरिया हमारे पास होता | इतना बड़ा और मोटा सरिया तो हम ख़ुशी ख़ुशी लेते |

Loading...

मैंने कहा ये सरिया और इसका जरिया दोनों आपके सामने खड़ा है | वो दोनों मुझे हवास से भरी निगाहों से देखते हुए बोली काश हम ले पाते | साला उसका नाम था वैशाली पर पूरी वैश्या थी साली | पर ये सब बाद की बात थी मुझे अब अपने लंड की प्यास को ख़तम करना था बस | मेरा शिकार भी कोई आम सी चीज़ नहीं थी क्यूंकि गाँव के मुखिया की बीवी और बेटी मतलब गाँव की इज्ज़त | अब इससे बड़ा हाथ मेरे जैसा इंसान क्या मार सकता है | बस अब कहानी शुरू तो हो चुकी थी बस मुझे इसको ख़त्म करना था | पर दोनों माँ और बेटी को एक साथ संभालना थोडा मुश्किल था इसलिए मैंने दोनों को अलग अलग सेट करना चालू कर दिया | मैं उसकी बेटी को नदी के पास मिलता और उसकी बीवी को अपने खेत पर बुला लेता | अब ये सिलसिला ऐसा चलने लगा जैसे सब कुछ पहले से चल रहा था | सीरत तीन मुलाकात |

सुन रहे हो दोस्तों सिर्फ तीन मुलाकात में दोनों मेरे अंटे में आ गयी | बस क्या था एक को खेत की ताज़ी हवा खिला दी और एक को तैरना सिखा दिया | इतने से खर्चे में उनकी चूत मेरे लंड के लिए तड़पने लगी थी | अब बारी थी उसकी बीवी की जो कि कुछ ज्यादा ही उतावली थी | इसलिए मैंने सबसे पहले उसको चोदने के लिए जाल बिछा दिया | अब मेरा काम बस इतना था कि वैशाली को अपने खेत वाले कमरे में बुलाना था | वो ज्यादा देर के लिए घर से निकल नहीं पाती थी क्यूंकि उसका पति यानी गांडू मुखिया उसको अकेला नहीं छोड़ता था | दोस्तों आज एक ब्रह्म ज्ञान लेलो क्यूंकि ये आगे जिंदगी में काम आएगा |

“एक मर्द अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड को तब तक अकेला नहीं छोड़ता जब तक कि उसके सामान में दिक्कत  हो या फिर वो उसके पीछे पागल हो |”

तो मुखिया का लंड वैसे ही ख़राब था और प्यार का तो बनता नहीं है | इसलिए उसने अपनी पत्नी को अकेले छोड़ना सही नहीं समझा पर किस्मत जब मेहरबान हो तो किसकी मजाल जो बन्दे को रोक ले | मुझे मौका मिल गया और मैंने वैशाली को बुला लिया खेत पर क्यूंकि मुखिया गया था बहार गाँव के काम से | मैंने उसको बुलाया और अपने खेत के कच्चे कमरे में उसको लेकर गया | वहां मैंने शुरू किया अपना अलसी काम | मैंने सबसे पहले उसको अच्छे से निहारा और उसको बाहों में भरके उसको चूमा | उसके बाद मैंने उसकी साडी को सरका दिया और उसके ब्लाउज के अन्दर भरे हुए उसके बड़े बड़े दूध और उनके बीच कि तीखी नाली साफ़ दिख रही थी | मैंने एक हाथ रखा उसकी कमर पर और वो मुझे लिपट गयी | बड़ी चिकनी कमर और बदन की मालकिन थी वो | उसके बाद मैंने उसके दूध पर किस किया और हलके हाथ से उसके दूध को दबाने लगा ब्लाउज के ऊपर से ही |

वो मचलते हुए मुझसे लिपटी रही और फिर जब वो गरम होने लगी और उसके हाथों ने भी हरकत करना शुरू कर दिया | वो मेरे सीने आर हाथ फेरने लगी और मुझे चूमने लगी | उसके बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा और फिर मुझे एक ऐसा एहसास हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था | एक शादीशुदा औरत जब लंड पकडती है तब पता नहीं कैसा जादू हो जाता है | उसने मेरे कड़क लंड को पकड़ा और उसे हिलाने लगी | मैंने भी उसके ब्लाउज को उतार दिया और उसने ब्रा नहीं पहनी थी | पर उसके दूध इतने कड़क और बड़े थे कि वो मेरे हाथों में नहीं समा पा रहे थे | पर उसके दूध रेशम के जैसे मुलायम थे और मैं उन्हें चूसने के लिए तड़प रहा था | फिर उसने खुद ही अपने निप्पल पर मेरा मुंह रख दिया और कहा इन्हें चूस चूस के लाल कर दो बरसों से प्यासी हूँ मैं | उसके बाद मैंने अपना पूरा जोर लगा दिया और उसकी निप्पल्स को काट काट के चूसा और उसके दूधों को जम के दबाया | उसके बाद मैंने उसको पूरा नंगा कर दिया और खुद भी पूरा नंगा हो गया | उसका भरा हुआ बदन किसी अप्सरा से कम नहीं था | मैंने उसे नीचे लेटा दिया और उसके पूरे बदन को चूमने लगा | आगे पीछे ऊपर नीचे हर जगह मैंने उसको चूमा और वो चुदाई की चरम सीमा पर पहुँचने लगी | उसके बाद उसने मेरा लंड पकड़ा और कहा इतना बड़ा लंड मेरे लिए ही है और मैं इससे अपनी प्यास बुझाने वाली हूँ | इतना कहा और झट से उसने मेरा पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया |

उसने मेरा लंड पहले चाटा ओरुसके बाद पूरा लंड अपने मुंह में भर लिया उसके बाद उसने मेरे लंड को अच्छे से चूसा और धीरे से अपने गले तक उतार लिया | मुझे ऐसा मज़ा आज तक नहीं आया था | उसने तो मुझे मदहोश कर दिया था | फिर उसने जोर जोर से मेरे लंड को चूसा और उसके ऐसा करने से मेरे लंड से मुट्ठ की ऐसी बारिश हुयी कि उसके गले से नीचे उतर गया | फिर भी मेरा लंड बिलकुल कड़क था जैसे उसकी चूत को फाड़ के ही दम लेगा | उसने मुझे कहा कि आज तक उसकी चूत का स्वाद किसी ने भी नहीं लिया तो मैंने कहा ठीक है मैं आज ये काम पूरा कर डिंगा | मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया और वो आह्ह्ह उम्म्म्म आआह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह उम्म्मम्म करने लगी | उसकी चूत एक दम गीली थी और मैंने उसकी चूत का पूरा पानी पी लिया | उसके बाद मैंने उसकी चूत में एक ऊँगली डाली और अन्दर बाहर करते हुए उसकी चूत को चाटने लगा | वो आह्ह्ह उम्म्म्म आआह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह उम्म्मम्म करते हुए मेरा साथ देने लगी |

उसने कहा बस अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है अब तुम मेरी चूत में लंड दाल दो | मैंने उसकी चूत में एक झटके में ही अपना लंड दाल दिया और वो चिल्ला पड़ी | मैंने फिर भी उसको चोदना चालु रखा और थोड़ी देर बाद वो कहने लगी आह्ह्ह उम्म्म्म आआह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह उम्म्मम्म इतना बड़ा लंड मुझे पहली बार मिला है मेरी चूत की आग शांत करदो | इतना सुनते ही मैंने अपनी चुदाई को जोर जोर से करना शुरू कर दिया | वो बस आह्ह्ह उम्म्म्म आआह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह उम्म्मम्म करते हुए मुझसे चुदती जा रही थी | करीब आधे घंटे के बाद मैंने उसकी चूत के अन्दर ही माल भर दिया और थोड़ी देर बाद वो वहां से चली गयी | पर पता नहीं उसकी बेटी भी मेरे खेत पर आ गयी और उसने मुझे नंगा देख लिया |

उसने मेरा लंड तुरंत पकड़ा और चूसने लगी और मैंने भी उसकी चूत को सहला दिया बस फिर क्या वो खोल के लेट गयी और कहने लगी चोदो | मैंने उसका मन रखने के लिए उसकी चूत में लंड डाला और वो रो पड़ी क्यूंकि उसकी सील खुल गयी थी | मैंने भी उसको रगड़ के चोदा पर उतना दम बचा नहीं था इसलिए मैं उसे बीस मिनट तक ही चोद पाया | फिर उसकी माँ की गांड और बेटी की गांड चुदाई हलती रही अरीब तीन साल तक |

इस अन्तर्वासना कहानी को शेयर करें :
error:

Online porn video at mobile phone