बस में मिली लड़की


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मेरा नाम रंजीत है, मैं एक कंपनी में नौकरी करता हूं और मैं इंदौर का रहने वाला हूं। मैं हमेशा ही अपने काम से शाम को ही बस से घर लौटता हूं। मैं जिस कंपनी में नौकरी करता हूं उसी कंपनी में मेरे चाचा भी काम करते हैं, वह उस कंपनी में काफी वर्षों से काम कर रहे हैं इसीलिए उन्होंने मेरी नौकरी अपनी कंपनी में लगवा दी। जब मेरी नौकरी इस कंपनी में लगी तो मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि मुझे एक अच्छी तनख्वाह मिल रही है और मैं बहुत ही खुश हूं। मेरे पिताजी प्राइवेट संस्थान में नौकरी करते हैं और वह अपनी जमापूंजी से घर का खर्चा चला रहे हैं। मैं उन्हें कभी कबार कुछ पैसे दे देता हूं क्योंकि मेरी बहनों की शादी अभी कुछ समय पहले ही हुई है इसलिए मेरे पिताजी ने उनकी शादी में काफी पैसा खर्च कर दिया और अब वह पैसा जोड़ रहे हैं, ताकि वह मेरी शादी करवा पाएं।

मेरे पिताजी बहुत ही सिंपल हैं और वह किसी भी चीज का शौक नहीं रखते, ना तो वह किसी के घर आते जाते हैं और ना ही वह किसी से ज्यादा संपर्क में रहते हैं। मेरी मां का व्यवहार भी उन्हीं के जैसा हो गया है, पहले वह आस पड़ोस में बैठने के लिए चली जाती थी परंतु अब वह कहीं भी नहीं जाती। मैं कई बार अपनी मां से कहता हूं कि आप पड़ोस में बैठने के लिए चले जाया कीजिए लेकिन वह कहती हैं कि मैं अब कहीं जाना पसंद नहीं करती इसलिए मैं उन्हें कभी भी ज्यादा नहीं कहता। अब हम तीनो ही घर में रह गए हैं और मेरी बहनों की शादी हो चुकी है। मेरी बहन का नेचर बहुत ही अच्छा है, वह लोग मुझे हमेशा ही फोन करते हैं। मेरी दोनों बहने मुझसे मिलने के लिए घर पर आती है और मुझे बहुत खुशी होती है जब वह दोनों मुझसे मिलने आती हैं। उन दोनों की शादी एक अच्छे परिवार में हुई है इसीलिए पिताजी बहुत खुश हैं और जब भी वह दोनों घर पर आती हैं तो पिताजी उनको बहुत बात करते हैं, वैसे वह मुझसे बहुत कम बात करते हैं परंतु जब मेरी बहने घर पर आती है तो उस दिन वह बहुत खुश होते हैं। मेरी भी ऐसे ही दिनचर्या चल रही है और मैं भी अपने काम से बहुत खुश हूं।

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मेरी मुलाकात ज्यादा अपने दोस्तों से नहीं हो पाती क्योंकि वह लोग भी अपने काम में व्यस्त हैं और मैं भी अपने काम में व्यस्त हो गया हूं इसीलिए जिस दिन मेरी छुट्टी होती है उस दिन मैं उन्हें फोन कर देता हूं और वह लोग मुझे मिल जाते हैं। मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब वह लोग मुझसे मिलते हैं, हम लोग अपने कॉलेज के दिनों को याद कर लिया करते हैं और वह मुझे हमेशा ही चिढाते हैं क्योंकि कॉलेज में मेरी एक लड़की थी लेकिन मैं उससे कभी भी अपने दिल की बात नहीं कह पाया इसी वजह से वह लोग मुझे बहुत चिढ़ाते हैं और कहते हैं कि तुम्हारी हिम्मत बिल्कुल भी नहीं हो पाई यदि तुम उससे उसी वक्त कह देते तो शायद तुम दोनों का रिलेशन आगे बढ़ जाता लेकिन मैं उस लड़की से कभी भी अपने दिल की बात नहीं कर पाया। मैंने जब कुछ समय पहले उसकी सहेली से पूछा तो वह कहने लगी कि उसकी तो अब शादी हो चुकी है। एक दिन मैं अपने ऑफिस से वापस लौट रहा था तो मैं बस की सीट में बैठा हुआ था और जब आगे स्टेशन में गाड़ी रुकी तो उसमें एक गर्भवती महिला चढ़ी, उसके साथ में एक लड़की भी थी लेकिन बस पूरी भरी हुई थी इसलिए उन्हें किसी ने भी सीट नहीं दी, फिर मैंने उन्हें अपनी सीट में बैठा दिया। जब मैंने उन्हें अपनी सीट में बैठाया तो वह मुझे शुक्रिया कहने लगी। मैंने उन्हें कहा कोई बात नहीं। मैंने उनसे पूछा कि आप लोग कहां जा रहे हैं, वह कहने लगी कि हम लोग आगे के स्टेशन पर ही उतर जाएंगे। उन महिला के साथ में जो लड़की थी मैंने उनसे उनका नाम पूछ लिया, उनका नाम आंचल है। वह लोग मुझसे बहुत ही अच्छे से बात कर रहे थे और मैं भी उनके साथ काफी बात कर रहा था लेकिन उनका स्टेशन आ गया और वह दोनों ही उतर गए। मुझे आंचल बहुत अच्छी लगी लेकिन उससे मेरी ज्यादा बात नहीं हो पाई और मैं हमेशा की तरह ही अपने काम पर आने जाने लगा। मेरे दिमाग से बिल्कुल ही यह बात उतर चुकी थी कि मुझे उस दिन वह लड़की मिली थी। एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ मॉल में था तो उस दिन आंचल मुझे दिखाई दी और आँचल ने मुझे पहचान लिया,  मुझे पहले लगा कि शायद वह मुझसे बात नहीं करेगी लेकिन उसने मुझसे बात की और मुझसे पूछने लगी कि आप यहां पर कुछ सामान लेने आए हैं।

मैंने उसे बताया कि हां मैं अपने लिए शॉपिंग करने के लिए यहां आया था। मैंने अपने दोस्तों को कहा कि तुम शॉपिंग कर लो, मैं थोड़ी देर आँचल के साथ बैठ जाता हूं। आँचल उस दिन अकेली थी इसलिए हम दोनों उस दिन सीसीडी में बैठ गए, हम दोनों ही साथ में बैठे हुए थे और मैं आंचल के साथ में काफी बातें कर रहा था, वह भी मुझसे बात कर के बहुत खुश हो रही थी और कह रही थी कि उस दिन आपने मेरी दीदी को सीट दी तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने आँचल से पूछा कि क्या वह महिला आपकी दीदी हैं, वह कहने लगी हां वह मेरी दीदी हैं और उनकी शादी को दो वर्ष हो चुके हैं। मैंने उस दिन आंचल से उसका नंबर ले लिया और उसके बाद हम दोनों ही मॉल से घर के लिए चले गए। मैंने काफी दिनों तक आंचल को फोन नहीं किया लेकिन एक दिन उसका फोन मुझे आ गया और वह मुझसे पूछने लगी कि आप कैसे हैं, मैंने उसे कहा कि मैं तो अच्छा हूं। मैंने भी उसे उस दिन उसके हाल चाल पूछे, उसने उस दिन मुझे बताया कि उसकी दीदी को एक लड़की हुई है, मैंने उसे बधाई दी और कहा कि यह तो बहुत खुशी की बात है, अब तुम मौसी बन गई हो। वह कहने लगी हां मैं मौसी बन गई हूं तो मैं सोच रही हूं की तुम्हें उस चीज की पार्टी दू।

उसने मुझे अपने घर के पास ही एक रेस्टोरेंट में बुला लिया और हम दोनों ही वहां पर बैठे हुए थे। उस दिन आंचल बहुत ही सुंदर लग रही थी, वह मुझसे पूछने लगी तुम क्या आर्डर करवा रहे हो, मैंने मेनू कार्ड में देखा और अपना आर्डर करवा दिया। हम दोनों ने साथ में ही डिनर किया और काफी रात भी हो चुकी थी लेकिन आंचल कहने लगी कि क्या तुम्हें घर के लिए देर हो रही है, मैंने उसे कहा कि नहीं मैं अभी कुछ देर तुम्हारे साथ रुक जाता हूं। हम दोनों ही उसके घर के पास में एक छोटा सा पार्क है वहां पर बैठे हुए थे। मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे घर पर कौन कौन है वह कहने लगी कि मेरे घर पर मेरे माता-पिता है और मेरी बहन की शादी हो चुकी है। आंचल और मैं साथ में ही पार्क में बैठे हुए थे और उस पार्क में उनके कॉलोनी के काफी लोग घूम रहे थे। हम लोग भी टहलने लगे, चलते चलते मैंने आंचल का हाथ पकड़ लिया और उसने भी मेरे हाथ को अपने हाथ में ले लिया। हम दोनों ही साथ में टहलने लगे। मैं आंचल से भी अपने घर के बारे में बात कर रहा था और उसे अपने घर के बारे में बता रहा था। मैंने जितनी भी बात अंचल से कि मुझे उससे बात कर के बहुत अच्छा लगा और वह भी मुझसे बात करते हुए बहुत खुश हो रही थी। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम्हें डर नहीं है, तुम मेरे साथ घूम रही हो। वह कहने लगी मुझे किस चीज का डर होगा। मैंने उसे कहा कि तुम्हारी कॉलोनी के सब लोग हमें देख रहे हैं और तुम बिल्कुल भी उन्हें देखकर नहीं डर रही हो, वह कहने लगी कि इसमें डरने की कौन सी बात है हम दोनों साथ में ही तो घूम रहे हैं। मैंने आँचल से पूछा कि क्या तुम्हें मेरे साथ में समय बिताना अच्छा लग रहा है, वह कहने लगी हां मुझे तुम्हारे साथ समय बिताना बहुत अच्छा लग रहा है। रात भी काफी हो चुकी थी लेकिन हम दोनों अब भी साथ में ही थे।

हम दोनों उसके बाद पार्क की सीट पर बैठ गए हम दोनों बैठ कर बात कर रहे थे तभी मैंने उसकी जांघ पर हाथ रख दिया लेकिन उसे कुछ भी महसूस नहीं हुआ। धीरे-धीरे जब मैं उसकी जांघ को सहलाने लगा तो वह मूड में आ चुकी थी। वह कहने लगी कि तुम मेरे घर चलो मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हारे घर पर क्या करूंगा। वह कहने लगी मेरे घर पर आज कोई भी नहीं है इसलिए मैंने तुम्हें यहां बुलाया था। मुझे पहले से ही पता था कि तुम्हारा मूड मुझे देख कर खराब हो जाएगा इसलिए मैंने तुम्हें आज ही बुलाया। हम दोनों उसके घर पर चले गए जैसे हि मैं आंचल के घर गया तो मैंने उसके होठों को अपने होठों में लेकर किस करना शुरू कर दिया काफी देर तक उसके होठों को चूसा उसके बाद मैंने उसे नंगा किया। उसका शरीर बहुत ज्यादा टाइट था मैंने उसके स्तनों पर जैसे ही अपने हाथ को लगाया तो वह मचलने लगी और पूरे मूड में आ गई। मैंने भी अब उसे उसके बिस्तर पर लेटा दिया और उसकी योनि को चाटना शुरू किया। मैंने काफी देर तक उसकी योनि को चाटा जिससे कि उसकी अंदर की गर्मी बाहर आ गई। मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर लगा दिया और जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में घुसा तो वह पूरे मूड में आ गई और मेरा साथ देने लगी। वह अपने दोनों पैरों को खोल लेती और मैं उसे बड़ी तेजी से झटके देता। मैंने उसे इतनी तेजी से झटके मारे कि उसके स्तन हिल रहे थे और मैं उन्हें अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। लेकिन उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर निकल रही थी उसी गर्मी में मेरा वीर्य उसकी योनि में जा गिरा। हम दोनों बैठ गए और बातें करने लगे। उसने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ा हुआ था। वह अब भी मेरे लंड को हिलाने पर लगी हुई थी उसक बाद हम दोनों सो गए और अगले दिन में सुबह उठकर अपने घर चला गया।

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