चूत की गर्मी को शांत किया


desi kahani, hindi sex story एक दिन मुझे मेरे चाचा जी का फोन आता है। मेरे चाचा जी बेंगलुरु में जॉब करते हैं और उनका परिवार हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रहता है। चाचा जी की सरकारी नौकरी है और जब उनका फोन मुझे आता है तो चाचा जी मुझे कहते हैं की सुनो बेटा क्या तुम आज फ्री हो? मैंने चाचा जी से कहा हां चाचा जी मैं फ्री हूं आप बताइए क्या काम था, वह मुझे कहने लगे क्या तुम अपनी चाची को कुछ पैसे दे दोगे, मैंने उन्हें कहा हां चाचा जी मैं अभी देकर आता हूं। वह कहने लगे लेकिन पूरी बात तो सुन लो मैंने कहा जी कहिए वह मुझे कहने लगे दरअसल तुम्हारी चाची जी के बैंक अकाउंट में कोई दिक्कत आ रही है इस वजह से उनके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर नहीं हो पा रहे और कल छोटू की फीस भी जमा करनी है, छोटू उनके लड़के का नाम है।

मैं तुम्हारे अकाउंट में पैसे डाल देता हूं तुम जाकर चाची को दे आना मैंने चाचा जी से कहा हां चाचा जी आप ट्रांसफर कर दीजिए मैं आज ही उन्हें पैसे दे आता हूं चाचा कहने लगे बस मैं कुछ देर बाद तुम्हारे अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करवाते ही तुम्हें फोन कर दूंगा मैंने उन्हें कहा ठीक है। करीब एक घंटे बाद उन्होंने पैसे अकाउंट में ट्रांसफर करवा दिया और मुझे फोन भी कर दिया वैसे तो मेरे फोन में मैसेज आ चुका था लेकिन चाचा जी ने मुझे फोन कर दिया और मुझे कहा बेटा तुम याद से पैसे दे देना। मैंने कहा ठीक है चाचा जी मैं अभी पैसे निकालकर चाची को दे आता हूं, उसके बाद मैंने अपने एटीएम से पैसे निकाले और मैं चाची को पैसे देने के लिए चला गया चाचा जी ने शायद घर पर पहले ही फोन कर दिया था इसलिए चाची को यह बात बता थी कि मैं घर पर आने वाला हूं मैं जैसे ही घर पहुंचा तो चाची मुझे कहने लगी और बेटा रोशन तुम कैसे हो? मैं चाची से कहने लगा चाची मैं तो ठीक हूं आप सुनाइए आप लोग कैसे हैं, चाची मुझे पूछने लगी तुम्हारी नौकरी ठीक चल रही है मैंने चाची से कहा कहां चाची बस ऐसे ही आजकल तो घर पर ही बैठा हूं और कोई काम वाम मेरे पास है नहीं ।चाची कहने लगे कोई बात नहीं बेटा अभी तो तुम्हारी पढ़ाई पूरी हुई है धीरे धीरे तुम ट्राई करते रहो सब कुछ अच्छा हो जाएगा।

मैंने चाची जी से कहा चाची चाचा ने पैसे भिजवाए थे तो वह देने मैं आपको आया था चाची कहने लगी हां तुम्हारे चाचा जी ने मुझे बताया था क्योंकि कल छोटू की फीस जमा करनी है और मेरे बैंक अकाउंट में दिक्कत आ रही है जिस वजह से मेरे खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं हो पा रहे हैं, मैने चाची जी से कहा हां चाचा जी ने मुझे यह बात बता दी थी। मैंने चाची को पैसे दिए और मैंने चाची से कहा मैं अब चलता हूं चाची कहने लगी नहीं बेटा तुम आज दिन का खाना यहीं से खा कर जाओगे मैंने चाची से कहा नहीं चाची मैं चलता हूं नहीं तो मम्मी गुस्सा हो जाएंगी मैंने घर पर कुछ कहा भी नहीं है चाची कहने लगी बेटा तुम यहां रुक जाओ थोड़ी देर बाद मैं खाना बना दूंगी उसके बाद तुम चले जाना, मैंने भी सोचा चलो थोड़ी देर रुक जाता हूंम चाची मुझे कहने लगी तब तक मैं कपड़े धो देती हूं चाची बाथरूम में कपड़े धोने लगी और मैं टीवी देख रहा था तभी ना जाने एक लड़की आई और वह मुझे कहने लगी क्या आंटी घर पर है मैंने उसे कहा हां जी घर पर है लेकिन वह कपड़े धो रही हैं, उस लड़की ने शायद बाथरूम में चाची को आवाज दी लेकिन चाची को सुनाई नहीं दिया और वह मेरे पास आकर बैठ गई मैं बार-बार उसे देखे जा रहा था और वह भी मेरी तरफ देख रही थी आखिरकार हम दोनों की बात हो ही गई मैंने उससे पूछ ही लिया आपका क्या नाम है। वह मुझे कहने लगी मेरा नाम प्रीति है और मैं यही पड़ोस में रहती हूं। मैंने उसे कहा प्रीति आप क्या करते हैं तो वह कहने लगी मैं कॉल सेंटर में जॉब करती हूं और आज मेरी छुट्टी थी मैंने प्रीति से कहा चलिए यह तो बहुत अच्छी बात है प्रीति और मैं एक दूसरे की बातों में इतना खो गए कि हम दोनों को पता ही नहीं चला कि चाची कब हमारे सामने आकर खड़ी हो गई चाची मेरी तरफ देखने लगी और मैंने अपनी नजरें झुका ली चाची ने प्रीति से पूछा हां बेटा क्या तुम कुछ काम से आई थी। प्रीति कहने लगी हां चाची जी मैं यह कहने आई थी कि मम्मी ने आप को शाम को घर पर बुलाया है चाची ने प्रीति से पूछा क्या कोई जरूरी काम था प्रीति कहने लगी मुझे नहीं पता क्योंकि शाम को मैं अपनी सहेली के साथ जा रही हूं अब क्या मालूम मम्मी ने आपको बुलाया है आप खुद मम्मी से ही पूछ लेना और वह यह कह कर चली गई।

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मैंने भी दोपहर का खाना खाया और उसके बाद मैं अपने घर चला आया लेकिन मेरे पास कोई काम था नहीं तो मैंने सोचा आज शाम को मैं भी मार्केट हो आता हूं मैं शाम को मार्केट चला गया और इत्तेफाक की बात यह रही कि प्रीति भी उस दिन मुझे शाम के वक्त मार्केट में दिख गयी वह सामान खरीद रही थी मैंने जैसे ही प्रीति को देखा तो मैं उसके पास गया और जब मैं उसके पास गया तो उसने मुझे देखते हुए कहा रोशन तुम यहां क्या कर रहे हो मैंने उसे कहा यही सवाल मैं तुमसे पूछ रहा हूं तुम यहां क्या कर रही हो तो वह कहने लगी मैं तो यहां पर अक्सर आती रहती हूं और आज मैं शॉपिंग करने आई थी क्योंकि आज मेरी छुट्टी थी। उसने मुझे अपनी सहेली से मिलवाया और मेरा परिचय करवाया मैं बहुत खुश था क्योंकि प्रीति से मेरी मुलाकात हो गई थी मैंने प्रीति से कहा चलो अब मैं चलता हूं मैं तुम्हें किसी और दिन मिलूंगा।

प्रीति कहने लगी लेकिन हम लोगों का संपर्क कैसे होगा मैंने उसे कहा मैं चाची के यहां आता जाता रहता हूं तुम मुझे बता देना तुम्हारी छुट्टी किस दिन रहती है उसने मुझे बता दिया और उसके बाद मैं वहां से अपने घर के लिए चला गया लेकिन मैं अपने मन ही मन सोचता रहा की प्रीति मुझे सुबह ही मिली और उससे मेरी इतनी अच्छी बातचीत हो गई कि मैंने कभी उम्मीद भी नहीं की थी मैं प्रीति के बारे में सोच कर ही खुश हो जाता हूं मैं अपने मन में सिर्फ प्रीति के लिए सपने पालने लगा और अगले हफ्ते मैं चाची के घर पर चला गया चाची मुझे कहने लगी अरे रोशन बेटा तुम आज यहां कैसे? मैंने कहा बस चाची ऐसे ही आपसे मिलने आ गया चाची जी मुझे कहने लगे तुम्हारे मम्मी-पापा ठीक है मैंने चाची से कहा हां वह लोग तो ठीक हैं और मैं उनके घर पर बैठ गया। मैंने चाची से पूछा क्या आपने छोटू की फीस जमा कर दी थी चाची कहने लगी हां बेटा मैंने तो छोटू की फीस जमा कर दी थी और तुम्हारे चाचा जी को मैंने यह बात बता दी थी कि मैंने छोटू की फीस जमा कर दी है यदि उस दिन तुम समय पर पैसे नहीं लाते तो उसके स्कूल से नोटिस आ जाता और वैसे भी उस वक्त मेरे पास बिलकुल भी पैसे नहीं थे और तुम्हें तो पता ही है कि महंगाई आजकल कितनी ज्यादा है घर के खर्चे चलाना भी मुश्किल हो जाता है मैंने चाची से कहा हां चाचा जी आप बिल्कुल सही कह रही हैं महंगाई तो वाकई में बहुत बड़ चुकी है। जब हम लोग बात कर रहे थे तो चाची ने मुझे कहा मैं अभी तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूं। चाची किचन में चली गई और कुछ देर बाद प्रीति भी आ गई। चाची किचन में थी वह चाय बनाने लगी तब प्रीति आ गई प्रीति और मैं साथ में बैठे कर बात करने लगे।

मैं प्रीति की तरफ देखे जा रहा था, जब मैंने अपने हाथ को उसकी जांघ पर रखा तो शायद उसके अंदर भी एक अलग ही उत्तेजना पैदा होने लगी और वह मेरे होठों को चूमने लगी। उसने मेरे होठों पर किस किया ही था, मैंने उसे कहा चाची आने वाली है और चाची आ गई। हम दोनों ने साथ में चाय पी लेकिन उस दिन शायद मेरी किस्मत ही अच्छी थी चाची कहने लगी बेटा मैं आधे घंटे में आती हूं मुझे कुछ काम है, चाची चली गई। हम दोनों को मौका मिल गया प्रीति और मैं साथ में बैठे हुए थे जब प्रीति ने मेरे होठों को किस करना शुरू किया था तो मैंने भी उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसकी पतली सी कमर को अपने हाथ में पकड़ लिया। मैंने जैसे ही उसकी टी-शर्ट को उतारा तो उसने लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी मैंने उसकी ब्रा खोलते हुए उसके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और अच्छे से चूसने लगा, मैं उसके स्तनों को बडे अच्छे से चूस रहा था उसे भी बहुत मजा आ रहा था। मैंने उसके स्तनों से खून भी निकाल कर रख दिया था, जैसे ही मैंने प्रीति के लोअर को उतारा तो मैंने उसकी लाल रंग की पैंटी को उतार कर साइड में रख दिया और उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।

उसकी चूत में एक भी बाल नहीं था, उसको चाट कर मुझे बहुत मजा आ रहा था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि उसकी चूत को मैं सिर्फ चाटता ही रहा हूं और काफी देर तक मैंने उसकी योनि को चाटा परंतु जैसे ही उसकी योनि से गर्मी निकलने लगी तो मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर रगडना शुरू कर दिया, उसकी योनि को बड़े अच्छे से रगडता उसके अंदर की गर्मी बाहर निकलने लगी। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था, मुझे उसे धक्के मारने में भी बहुत मजा आ रहा था। मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था। उसकी योनि से भी खून का बाहव तेजी से होने लगा था उसकी चीख इतनी तेज होती कि मेरे कान में जाते ही मेरे अंदर का जोश और बढ़ जाता है। मैं तेजी से धक्के देकर उसे शांत करने की कोशिश करता लेकिन उसकी गर्मी शांत नहीं हो रही थी जैसे ही वह झड़ गई तो उसके बाद वह चुपचाप लेटी रही। मैं उसे लगातार तेजी से चोदता रहा परंतु मेरा वीर्य गिरी ही नहीं रहा था जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ और कुछ ही देर बाद चाची भी आ गई। चाची कहने लगी तुम दोनों अब तक बैठे हो, हम दोनों मुस्कुराने लगे।

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