मेरी चूत की अनबुझी प्यास


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मेरा नाम मीनाक्षी है मैं 26 वर्ष की हूं। हम लोग आगरा के रहने वाले है और मेरे पिताजी रेलवे में नौकरी करते हैं,  मेरे पिताजी को रेलवे में नौकरी करते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं। मेरे बड़े भैया की नौकरी भी रेलवे में ही लग गई है और उनके लिए पिताजी रिश्ता देख रहे हैं। उनकी पोस्टिंग इस वक्त कोलकाता में है। पिताजी ने उनके लिए अपने ही दोस्त की लड़की पसंद की है, उसके बाद उन्होंने मेरे भाई को फोटो भेज दी और भैया को वह लड़की काफी पसंद आई। भैया शादी के लिए तैयार हो गए  और उसके बाद भैया की सगाई हो गई। अब भैया की शादी की तैयारियां होने लगी। जब भैया की शादी हो गई तो भैया उसके कुछ समय बाद ही भाभी को अपने साथ कोलकाता ले गए।  हम लोग आगरा में ही हैं। मेरी मां घर का काम संभालती हैं और मैं भी उनकी मदद कर दिया करती हूं क्योंकि मेरी भी पढ़ाई अब खत्म हो चुकी है और मैं घर पर ही रहती हूं।

मेरे पिताजी सुबह अपने काम पर चले जाते हैं और शाम के वक्त वह काम से लौटते हैं। एक दिन मेरे पिताजी कहने लगे कि मेरा ट्रांसफर लखनऊ में हो गया है। हम लोगों का गांव आगरा के पास ही है इसीलिए हम लोगों ने आगरा में ही घर ले लिया लेकिन मेरे पिताजी का ट्रांसफर हो गया तो इस वजह से हमें लखनऊ में शिफ्ट होना पड़ा। हम लोग लखनऊ में रेलवे क्वाटर में ही रहते हैं। जब हम लोगों ने अपना सामान शिफ्ट किया तो उस वक्त मेरे भैया ने भी कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले ली थी और वह भी आगरा आ गए। उन्होंने भी हमारी काफी मदद की और हम लोगों ने लखनऊ में सामान शिफ्ट कर दिया। लखनऊ में हम लोगों को शुरुआत में कोई भी नहीं पहचानता था लेकिन धीरे-धीरे सब लोगों से हमारी मुलाकात होने लगी थी और सब लोग हमें पहचानने लगे थे। हमारी कॉलोनी में कोई भी प्रोग्राम होता तो हमें भी वहां पर बुलाते थे। एक प्रोग्राम के दौरान मैं भी गई हुई थी तो उसी प्रोग्राम में मुझे एक लड़का दिखा जो कि मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन वह कुछ देर बाद ही वहां से चला गया। हम लोग भी उसके बाद घर आ गए और कुछ दिनों बाद मुझे वह लड़का दोबारा से दिखा। वह हमारी कॉलोनी में ही रहता है। मेरी कॉलोनी में ही एक सहेली है उसका नाम अंजली है।

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मैंने उसी से उसके बारे में पूछा, वह कहने लगी कि उसके पिताजी भी रेलवे में ही है और वह हमारी कॉलोनी में ही रहता है। मैंने अंजलि से पूछा कि उसका नाम क्या है, वह कहने लगी कि उसका नाम राकेश है। मैंने अंजलि को कहा कि राकेश मुझे बहुत अच्छा लगा इसीलिए मैं चाहती हूं कि उससे मैं बात करूं। अंजली कहने लगी कि तुम उससे बात कर के क्या करोगी क्योंकि उसका पहले से ही रिलेशन है। मैंने उसे पूछा कि उसका किसके साथ रिलेशन है। वह कहने लगी कि हमारी कॉलोनी में एक लड़की रहती है उसका नाम रूपा है, उसके साथ उसका रिलेशन है। उसके बाद मैंने राकेश के बारे में सोचना ही छोड़ दिया लेकिन कुछ दिनों बाद मैं जब अपने घर से बाजार जा रही थी तो राकेश मुझे दिखाई दिया और राकेश ने हीं मुझसे आकर बात की। उसने मुझसे मेरा नाम पूछा, मैंने उसे अपना नाम बताया और वह कहने लगा क्या तुम इस कॉलोनी में नई आई हो, मैंने उसे कहा कि हां मैं इस कॉलोनी में नहीं आई हूं। वह मुझसे पूछने लगा की क्या तुम कॉलेज में पढ़ती हो, मैंने राकेश से कहा नहीं मैं कॉलेज नहीं पड़ती, मेरा कॉलेज कुछ समय पहले पूरा हो चुका है। उस दिन राकेश मुझसे काफी देर तक बात करता रहा और मैंने भी राकेश से काफी देर तक बात की लेकिन हम दोनों ही अपने कॉलोनी के गेट के पास खड़े थे इसलिए सब लोग हमें आते जाते देख रहे थे। मैंने राकेश से कहा कि मुझे यहां पर खड़ा होना अच्छा नहीं लग रहा क्योंकि सब लोग हमें देखे जा रहे हैं। वह मुझे कहने लगा कि इस कॉलोनी में सब इसी प्रकार के लोग हैं, जब भी कोई आपस में बात करता है तो वह लोगों उसे घूर घूर कर देखते हैं। मैंने राकेश को कहा कि मुझे सामान लेने के लिए जाना है तो मुझे देर हो रही है। वह कहने लगा मैं तुम्हें छोड़ देता हूं, उस दिन मैं राकेश के साथ ही बाजार गई। मैंने अपना सारा सामान ले लिया, उसके बाद जब हम लोग वापस लौट रहे थे तो रास्ते में एक पार्क है, हम लोग उसी पार्क में बैठ गए।

मैंने राकेश से कहा तुम अभी क्या कर रहे हो, वह कहने लगा मेरा कुछ समय पहले ही कॉलेज पूरा हुआ है और मैं अभी अपने आगे की तैयारी कर रहा हूं। मुझे राकेश के साथ बैठना बहुत अच्छा लग रहा था और मुझे नहीं पता था कि हम दोनों के बीच इतनी जल्दी दोस्ती हो जाएगी। उसने मुझसे अपनी गर्लफ्रेंड रूपा के बारे में भी बात की। मैंने राकेश से कहा कि मुझे मेरी सहेली ने तुम्हारे और रूपा के बारे में बताया था। मैंने उसे पूछा कि तुम दोनों का रिलेशन कैसे चल रहा है, वह कहने लगा मुझे रूपा के साथ रिलेशन रखना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। हम दोनों कॉलेज में थे उस वक्त ही मेरा रूपा के साथ रिलेशन है परंतु पहले वह मुझसे बहुत ही अच्छे से बात करती थी और मेरा रिलेशन भी उसके साथ अच्छा था परंतु जैसे-जैसे समय बीतता गया तो अब हम दोनों के रिलेशन पहले जैसा बिल्कुल भी नहीं रह गया है क्योंकि रूपा मुझ पर बहुत ज्यादा शक करती है और वह हमेशा ही मेरा फोन देखती है। मैंने उसे इस बारे में कभी नहीं कहा लेकिन मुझे उसके साथ रहना बिलकुल अच्छा नहीं लगता। इसी वजह से राकेश और उसके बीच में अब रिलेशन सही नहीं चल रहा था। मैंने राकेश से इस बारे में पूछा कि तुमने मुझे यह सब क्यों बताया। राकेश कहने लगा कि मुझे अंजलि ने तुम्हारे बारे में बताया था और वह कह रही थी कि मीनाक्षी तुम्हें बहुत पसंद करती है इसीलिए मैंने सोचा मैं तुम से इस बारे में बात करूं।

जब राकेश ने मुझसे यह बात कही तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा और मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हें वाकई में बहुत पसंद करती हूं इसलिए मैं सोच रही थी कि मैं तुमसे अपने दिल की बात कहूं लेकिन जब मुझे पता चला कि तुम्हारा और रूपा का रिलेशन है इस वजह से मैंने तुमसे कभी भी कुछ नहीं कहा और मुझे यह उम्मीद भी नहीं थी कि तुम मुझसे बात करोगे लेकिन अब तुमने मुझसे बात की तो मुझे तुमसे बात कर के बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा कि हमें घर चलना चाहिए क्योंकि मुझे काफी देर हो गई है। अब हम लोग अपने घर चले गए। राकेश और मेरी फोन पर बातें होने लगी थी और राकेश मुझे हमेशा ही फोन करता था। वह रूपा से बिल्कुल भी बात नहीं करता था। जब रूपा को उसके बारे में पता चला तो एक दिन वह मुझसे मिली और कहने लगी कि तुम्हारी वजह से ही राकेश मुझसे बात नहीं करता है। मैंने उसे कहा कि मैंने राकेश से कुछ भी नहीं कहा, हम लोग सिर्फ आपस में बात करते हैं और इससे ज्यादा हमारे बीच में कुछ भी नहीं है लेकिन उसने उस दिन  मुझे बहुत कुछ सुनाया था और उसके बाद वह अपने घर चली गई। जब यह बात मैंने राकेश को बताई तो राकेश ने भी रूपा को बहुत ही बुरा भला कहा और उन दोनों ने अब अपना रिलेशन खत्म कर लिया। राकेश और मेरा रिलेशन चलने लगा था और मैं राकेश के साथ बहुत खुश भी थी क्योंकि वह मुझसे बहुत ही अच्छे से बात करता था और मेरा बहुत ध्यान रखता है। एक दिन हमारे घर पर कोई भी नहीं था उस दिन राकेश और मैं फोन पर बात कर रहे थे। हम दोनों की फोन पर काफी बात हो रही थी और उस दिन हम दोनों के बीच अश्लील बातें होने लगी थी। राकेश ने जब मुझे कहा कि आज मेरा बहुत मन है तुम्हें चोदने का तो मैंने उसे कहा कि तुम मेरे घर पर आ जाओ हमारे घर पर कोई भी नहीं है। वह हमारे घर पर आ गया और जब वह घर पर आया तो मैंने तुरंत ही उसे कसकर पकड़ लिया और उसके होठों को चूसने लगी। वह भी मुझे बड़े अच्छे से किस कर रहा था और मेरा पूरा साथ दे रहा था। मैंने भी राकेश की पैंट को खोला और उसके लंड को अपने मुंह में समा लिया और मै अच्छे से सकिंग करने लगी।

मैं उसके लंड को अपने मुंह में ले रही थी उसने भी अपने लंड को मेरे गले तक घुसा दिया। वह मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी काफी देर तक उसने मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसा जिससे कि मेरी उत्तेजना भी पूरी चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी और मुझे भी बहुत मजा आने लगा। जैसे ही उसने मेरी नरम और मुलायम चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो मेरा पानी पूरा बाहर की तरफ आने लगा था और वह मेरे पानी को अपनी जीभ से चाट लेता। काफी देर तक उसने ऐसा ही किया लेकिन हम दोनो से बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने राकेश को कहा कि तुम मेरी योनि में अपने लंड को डाल दो। जब उसने मेरी चूत पर अपने लंड को टच किया तो मुझे बहुत  अच्छा महसूस होने लगा।  राकेश ने धीरे धीरे मेरी योनि के अंदर डाला तो मेरी चूत से खून निकलने लगा और मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। वह मझे झटके दिए जा रहा था और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जब वह मुझे झटके मार रहा था तो मैं भी उसका साथ दे रही थी अपने पैरों को मे खोल लेती मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। मैं अपने दोनों पैरों को खोल देती और उसका पूरा साथ देती। उसने मुझे अपने ऊपर लेटा दिया और जैसे ही उसने अपने लंड को मेरी योनि में डाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ लेकिन मैं उसका पूरा साथ दे रही थी। मैं भी अपनी चूतडो को उसके ऊपर नीचे करने लगी काफी समय तक मैंने ऐसा ही किया लेकिन जब मैं झड़ने वाली थी तो मैंने अपनी योनि को टाइट कर लिया। उसने मुझे काफी देर तक धक्के मारे लेकिन कुछ ही झटकों के बाद जैसे ही उसका माल मेरी योनि में गया तो मुझे बहुत गर्म महसूस हुआ। उसके बाद मैंने अपनी योनि को साफ किया और हम दोनों साथ मे बैठ कर बात कर रहे थे।

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